बिहार का ऐसा मंदिर जहाँ से सरकारी नौकरी में होता है बंपर सिलेक्शन, जानिए वजह

अक्सर आपने लोगों लोगों को ये कहते हुए सुना होगा की मंदिर मस्जिद बनाने से क्या होता है? उनकी जगह पर हॉस्पिटल या स्कूल बनवाना ज्यादा उचित समझा जाता है.
लेकिन बिहार में एक ऐसा मंदिर भी है, जहाँ से आए दिन किसी न किसी का सिलेक्शन सरकारी नौकरियों के लिए होता रहता है. यहां आने वाले युवाओं में से कोई ना कोई जरूर सफलता प्राप्त करते हैं.
बिहार के मंदिर से सरकारी नौकरी में बंपर चयन

गौरतलब है की आपने बिहार के सासाराम के रेलवे स्टेशन पर हर शाम प्रतियोगिता परीक्षा के तैयारी के लिए स्टूडेंट्स को इकट्ठा होते देखा होगा या उनके बारे में ख़बरों को पढ़ा होगा.
यह सिलसिला कई सालों से लगातार चलता आ रहा है. सासाराम रेलवे स्टेशन पर कॉम्पीटीशन एग्जाम्स का तैयारी करने वाले सैकड़ों छात्र-छात्राओं ने देश के अलग-अलग हिस्सों में सरकारी नौकरियां में सफलता हासिल की है.
लेकिन बाद में रेलवे स्टेशन पर पढाई करने में कानूनी एवं तकनीकी समस्या आने लगी. ऐसे में युवा धीरे-धीरे आसपास के मंदिरों और खुले जगह की ओर पहुंचने लगे.
यहां पढ़ने वाले बच्चों की सक्सेस रेट काफी अधिक

फिर क्या था? देखते-देखते ही सासाराम के कुराइचमोहल्ला स्थित पुराने महावीर मंदिर में युवाओं की टोली जुटना शुरू हो गई. युवाओं ने मिलकर इसे महावीर निःशुल्क क्विज सेंटर (Mahaveer Quiz and Test Centre) का नाम भी दे दिया और पठन-पाठन का काम शुरू कर दिया.
महावीर स्थान के चबूतरे पर बैठे युवाओं का यही सपना होता है कि वह भारत के किसी न किसी राज्य में सरकारी नौकरी में अपनी सेवाएं दे. सबसे ख़ास बात यह है कि यहां पढ़ने वाले बच्चों की सक्सेस रेट काफी अधिक है.
रेलवे से लेकर एसएससी सीजीएल परीक्षा में चयन
पिछले साल ही दारोगा की भर्ती परीक्षा में कुल 24 छात्रों का चयन हुआ था. और इतना ही नहीं, रेलवे के नौकरियों में भी यहां के बच्चे बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं.
रेलवे में स्टेशन मास्टर से लेकर एसएससी सीजीएल परीक्षा के जरिए एक्साइज इंस्पेक्टर के पद तक, यहां के विद्यार्थी आपको मिल जाएंगे. यहाँ आपको मुख्यतः सरकारी जॉब्स की तैयारी करने वाले लड़के बैठकर सेल्फ स्टडी करते दिख जाएंगे.
अपने घर से सेट करके लाते है क्वेश्चन पेपर

वैसे बच्चे जिनके पास संसाधनों की कोई कमी नहीं है वो प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करने के लिए पटना तथा दिल्ली की ओर चले जाते है. लेकिन कई स्टूडेंट्स ऐसे है जिनकी पारिवारिक या आर्थिक समस्या उन्हें ऐसा करने से रोक देती है.
फिर ऐसे बच्चे महावीर स्थान के प्रांगण में बैठकर अपनी पढ़ाई करते हैं. जो लड़के महंगे कोचिंग का फीस नहीं दे सकते हैं, वैसे युवा यहां इकट्ठा होकर एक दूसरे को पढ़ाते भी हैं.
बता दे की सभी अपने-अपने घरों से ही क्वेश्चन पेपर का सेट तैयार करके ले आते हैं और फिर एक दूसरे के साथ शेयर करते हैं. एक लड़का अगर किसी कोचिंग सेंटर में पढ़ कर आता है तो वह अपने पढ़े गए नोट्स पूरे ग्रुप को दे देता है.
इन स्टूडेंट्स को मोटीवेट करने के लिए समय-समय पर शिक्षा जगत की हस्तियां यहाँ आती रहती हैं. पटना के गुरु रहमान से लेकर कई नामी शिक्षक और सफल युवा इस लिस्ट में शामिल है.
नौकरी से छुट्टी मिलते है लगते है पढ़ाने
महावीर नि:शुल्क क्विज केंद्र को संचालित करने में अहम भूमिका निभाने वाले छोटेलाल सिंह का कहना हैं कि – “यह एक सामूहिक प्रयास का प्रतिफल है. वर्तमान में दारोगा के मेंस के अलावे एसएससी स्टेट लेवल एवं एसएससी जीडी परीक्षा की तैयारी चल रही है.
वैसे युवा जिन्होंने यहां से तैयारी करके सरकारी नौकरियां प्राप्त की है, वैसे युवा इसके संचालन में मदद पहुंचाते हैं. समय-समय पर महत्वपूर्ण पुस्तक तथा अन्य खर्च भी उठाते हैं. इतना ही नहीं, जब भी नौकरी से छुट्टी मिलती है, तो लड़कों को पढ़ाने भी चले आते हैं.”
Conclusion
बिहार के इस मंदिर के चबूतरे पर पढ़कर एक हजार से अधिक छात्र अब तक सरकारी नौकरी में सफलता हासिल कर चुके है. ध्यान देने वाली बात ये है की यहाँ कोई शिक्षक नहीं है सभी पढ़ने वाले छात्र ही एक दूसरे को पढ़ाते हैं तथा खुद पढ़ते हैं.
सभी स्टूडेंट्स एक दूसरे से अपने डाउट्स और समस्या का डिसकसन करते है और किसी प्रतियोगिता परीक्षा का फॉर्म आने पर जानकारी भी साझा करते है.आलम ये है की आज पूरे देश में यहां से पढ़ कर नौकरी करने वालों लोग मौजूद है.
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