बिहार की बदलेगी पहचान, हरिद्वार से भी सुंदर बनेगा सिमरिया धाम! तस्वीरें देख नहीं होगा विश्वास

उत्तरवाहिनी गंगा तट पर स्थित पावन सिमरिया धाम को हरिद्वार के हर की पौड़ी की तर्ज पर विकसित करने की कवायद शुरू कर दी गई है। हरिद्वार के हर की पौड़ी की सुंदरता श्रद्धालुओं को अपनी और आकर्षित करती है। कुछ ऐसा ही कार्य बिहार सरकार बेगूसराय के सिमरिया घाट के साथ करने जा रही है।

बिहार के मुख्यमंत्री नितीश कुमार खुद सिमरिया धाम के विकास कार्य में रूचि दिखा रहे हैं। उन्होंने नवंबर 2022 में सिमरिया कल्पवास मेले के  दौरान इसे विकसित करने के दिशा निर्देश दिए थे। सरकार का मानना है कि सभी विकास कार्य पूरा होने पर सिमरिया धाम धार्मिक पर्यटन का बड़ा केंद्र बनेगा।

Simaria Dham will be developed as a tourist destination
सिमरिया धाम को पर्यटक स्थल के रूप में विकसित किया जाएगा

आपको बता दे की जल संसाधन विभाग की ओर से इस कार्य के लिए कुल 114.97 करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे। जिसके तहत सीढ़ी घाट, रीवर फ्रंट और बाकी सुविधाओं का निर्माण किया जाएगा। सिमरिया धाम को पर्यटक स्थल के रूप में विकसित किया जाएगा। पूरे निर्माण कार्य को 18 महीने में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।

पिछले सप्ताह बिहार सरकार में मंत्री संजय कुमार झा ने सिमरिया धाम में होने वाले विकास कार्यों का पूजा-अर्चना कर कार्यारंभ किया। पावन सिमरिया धाम को हरिद्वार के हर की पौड़ी की तर्ज पर विकसित किया जाएगा। साथ ही यहां आने वाले श्रद्धालुओं के लिए अत्याधुनिक सुविधाओं का निर्माण किया जाएगा।

सिमिरिया में होगा आधुनिक सुविधाओं का निर्माण

बिहार के जल संसाधन मंत्री संजय कुमार झा ने बताया कि विभाग की ओर से तैयार योजना के तहत सिमरिया धाम में सीढ़ी घाट के निर्माण और रीवर फ्रंट का विकास किया जाएगा। इसके अलावा संपूर्ण कल्पवास मेला क्षेत्र में श्रद्धालुओं के लिए आधुनिक सुविधाओं का ख्याल रखा जाएगा।

सिमरिया धाम में राजेन्द्र सेतु और निर्माणाधीन 6 लेन पुल के बीच में गंगा की बाईं ओर से करीब 550 मीटर लंबाई में सीढ़ी घाट का निर्माण कराया जाएगा। इसके साथ ही स्नान घाट के नजदीक चेंजिंग रूम का निर्माण और सुरक्षा की पुख्ता इंतजाम किये जाएंगे।

गंगा आरती के लिए स्थल का निर्माण, धार्मिक अनुष्ठान के लिए मंडप का निर्माण, शेडेड कैनोपी, वॉच टावर, श्रद्धालुओं के बैठने की व्यवस्था और लैंडस्केपिंग, शौचालय परिसर, धर्मशाला, पार्क, पाथ-वे, पार्किंग, लाइटिंग का इंतजाम किया जाएगा। इसके अलावा छह लेन सेतु से दक्षिण में स्थित मुक्तिधाम को भी बेहतर बनाया जाएगा।

प्राचीन काल से ही सिमरिया में कल्पवास मेला का महत्व

आपको बता दे की प्राचीन काल से ही सिमरिया धाम में हर वर्ष कार्तिक मास में कल्पवास मेला लगता है, जिसमें बिहार ही नहीं, अन्य राज्यों और नेपाल तक से श्रद्धालु आते हैं। इनमें महिला श्रद्धालुओं और साधु-संतों की काफी अच्छी संख्या होती है।

सिमरिया में गंगा तट पर पर्णकुटी बना कर रहते हैं। रोजाना गंगा स्नान कर पूजा-अर्चना करते हैं। सांसारिक मोह-माया को छोड़ कर दिनभर भजन-कीर्तन में लीन रहते हैं। मान्यता है कि सिमरिया में कार्तिक मास में कल्पवास करने से घर-परिवार में सुख-शांति-समृद्धि आती है और मोक्ष की प्राप्ति होती है।

सिमरिया धाम: ‘गेटवे ऑफ मिथिला’

जल संसाधन मंत्री संजय कुमार झा ने कहा कि “सिमरिया धाम मिथिला का प्रवेश द्वार भी है। मिथिला के लोग इसे ‘गेटवे ऑफ मिथिला’ की तरह मानते आ रहे हैं। ये स्थल रेल और सड़क मार्ग से जुड़ा हुआ है। प्रस्तावित स्थल के दक्षिण में सिक्स-लेन पुल और हाईवे का निर्माण हो रहा है। जो पटना और खगड़िया को जोड़ेगा। दो बड़ा रेलवे स्टेशन बरौनी और मोकामा यहां से ज्यादा दूर नहीं है। यानी यहां कनेक्टिविटी का कोई इश्यू नहीं है।”

 

पर्यटन का तेजी से होगा विकास

मुख्यमंत्री ने सिमरिया धाम को हर की पौड़ी (हरिद्वार) से भी सुंदर बनाने का निर्देश दिया है। सिमरिया धाम का विकास और सौंदर्यीकरण होने पर यहां धार्मिक पर्यटन का विकास तेजी से होगा। दूर-दूर से श्रद्धालु आएंगे, धर्मशाला में ठहरेंगे।

With the development and beautification of Simariya Dham, religious tourism will develop rapidly here.
सिमरिया धाम का विकास होने पर धार्मिक पर्यटन का तेजी से होगा विकास

मिथिला और बिहार के विभिन्न जिलों से यहां आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में तो वृद्धि होगी। उन्हें यहां आकर गर्व भी महसूस होगा। इससे आसपास के इलाके में होटल और परिवहन सहित कई प्रकार के कारोबार और रोजगार के अवसर पैदा होंगे।

और पढ़े: राजधानी पटना में लीजिए रांची और कैमूर जैसे वाटरफॉल का आनंद, मन मोह लेंगी तस्वीरें