Vikramshila Setu: बिहार के विक्रमशिला सेतु में आई दरार, अब कार्बन प्लेट की कराई जाएगी जांच

Crack in Vikramshila bridge of Bihar

बिहार के फेमस विक्रमशिला सेतु को लेकर एक खबर सामने आई है, जिसके अनुसार दुरुस्तीकरण कार्य के दौरान विक्रमशिला सेतु के स्पेन में दरार आ गई है। अब इस दरार पर चिपकाए गए कार्बन प्लेट की जांच होगी।

फिलहाल मुख्य अभियंता से जल्द ही प्रस्ताव को सहमति मिलने की उम्मीद पर एनएच विभाग द्वारा एजेंसी बहाल करने की प्रक्रिया की शुरुआत कर दी गई है। आईये जानते है पूरा अपडेट।

विक्रमशिला सेतु पर वाहनों का दबाव पहले की अपेक्षा ज्यादा

दरअसल, विक्रमशिला सेतु पर वाहनों का दबाव पहले की अपेक्षा में ज्यादा बढ़ गया है। जाम की स्थिति में वाहनों का स्टेटिक लोड भी सेतु के अस्तित्व को नुकसान पहुंचा सकता है।

कंसल्टेंसी एजेंसी द्वारा दरार और इस पर चिपकाए गए कार्बन प्लेट के अलावा वाहनों के लोड की भी जांच की जाएगी। इसी जांच के आधार पर सेतु की मरम्मत कराने की योजना बनाई जाएगी।

जांच के दौरान यह भी देखा जाएगा कि सेतु अभी किस स्थिति में है। कहीं कार्बन प्लेट उखड़ तो नहीं गया है? दरार और ज्यादा तो नहीं बढ़ी है?

पुल निर्माण निगम के पास है रखरखाव की जिम्मेदारी

वर्ष 2016 के अक्टूबर-नवंबर में मुंबई की रोहरा रिबिल्ड एसोसिएट्स बरारी की ओर से चौथे व पांचवें पाए के स्पेन के दरार में कार्बन प्लेट लगाया गया था। एजेंसी के अभियंता ने इसकी समय-समय पर जांच कराने की बात करते हुए कहा था कि – “इससे पुल को कोई नुकसान नहीं पहुंचेगा।”

पुल के रखरखाव की जिम्मेदारी पुल निर्माण निगम के खगड़िया डिवीजन के पास था। कार्बन प्लेट चिपकाने के बाद इस डिवीजन स्तर से कभी जांच नहीं की जा सकी।

लेकिन जब सेतु हस्तांतरित होकर पुल निर्माण निगम के भागलपुर डिवीजन के पास आया, तो यहां से भी कभी कार्बन प्लेट की स्थिति की जाँच नहीं करवाई गई। फिलहाल के लिए विक्रमशिला सेतु एनएच विभाग, भागलपुर डिवीजन के पास ही है।

दरार और वाहनों के लोड की भी होगी जांच

एनएच के अभियंता मनोज कुमार ने कहा कि – “कार्बन प्लेट की जांच कंसल्टेंसी एजेंसी से कराई जाएगी। मुख्यालय से प्रस्ताव को मंजूरी मिलते ही इस पर काम शुरू किया जाएगा। सेतु के दरार और वाहनों के लोड की भी जांच होगी।”

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विक्रमशिला सेतु की मरम्मत पर 14 करोड़ 65 लाख रूपए खर्च

आपको बता दें कि विक्रमशिला सेतु की मरम्मत पर 14 करोड़ 65 लाख रूपए खर्च किए गए थे। इस दौरान मुंबई की एजेंसी ने पुल के स्पेन को जैक लगाकर उठाया था और बाल-बियरिंग को बदला था।

इसके अलावा एक्सपेंशन ज्वाइंट को भी बदला गया था। इसके साथ ही 4.5 किलोमीटर खोदकर सेतु की सड़क भी बनाई गई थी। बाल-बियरिंग बदलने के दौरान तो लंबे समय तक पुल बंद रहा था।

मरम्मत कार्य से पहले आइआइटी दिल्ली की टीम ने भी जांच की थी और पुल को चलने लायक नहीं बताया था। इसके बाद ही मरम्मत की कार्रवाई शुरू की गई थी।

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