कभी सोचा है मंदिरो में प्रवेश से पूर्व क्यों स्पर्श करते हैं सीढ़ियां, जानिए रहस्यमयी कारण

दोस्तों सनातन धर्म में मंदिर में जाने से पहले कुछ चीजों का खास ख्याल रखा जाता है। मंदिरों में प्रवेश करने से लेकर पूजा पाठ करने तक कई अलग-अलग रीति रिवाज बनाए गए हैं लेकिन बहुत कम लोगों को ही इसके पीछे का कारण पता है। क्या आप जानते हैं मंदिर में प्रवेश से पहले सीढ़ियों को छूकर प्रणाम क्यों किया जाता है आइए जानते है इसके पीछे का कारण-
मंदिर की सीढ़ियों को हम प्रणाम इसलिए करते हैं क्योंकि सनातन धर्म में हर उस वस्तु या जीव को पूजनीय माना गया है जो आपको ईश्वर के और निकट ले जाए और मंदिर की सीढ़ियां हमें ईश्वर से मिलने में मदद करती है, इसीलिए मंदिर की सीढ़ियों को मंदिर में प्रवेश के पहले स्पर्श किया जाता है जाता है।
पुराणों के अनुसार क्या है मान्यता
मंदिर में घुसने से पहले हम मंदिर की सीढ़ियों को स्पर्श करके इसलिए भी प्रणाम करते हैं क्योंकि अग्नि पुराण के अनुसार मंदिर, भगवान की बॉडी को रिप्रेजेंट करते हैं।
अग्नि पुराण में दिए एक श्लोक के अनुसार मंदिर का शिखर भगवान का मस्तक (सिर) होता है, सेंटम यानी कि गला,मंडप यानी की कमर ,गोपुरा यानी पैर और फ्लैग बताता है कि मंदिर की लाइफ कितनी है।
इसी तरह मंदिर की सीढ़ियां भगवान के चरणों को रिप्रेजेंट करती है यानी कि मंदिर में जाने से पहले हमने भगवान के चरणों को छुआ और फिर मंदिर में एंट्री की तो ये बहुत अच्छी बात है।
आत्मसमर्पण का संकेत
मंदिर में प्रवेश से पूर्व इसकी सीढ़ियों को छू कर प्रणाम करने से हम ईश्वर के प्रति खुद को समर्पित या फिर उनके अधीनस्थ खुद को करने का प्रयास करते हैं इससे यह भी प्रदर्शित होता है कि हे ईश्वर मैं आपके अधिनस्थ हूं और आप मेरी रक्षा करो।
अहंकार छोड़ मंदिर में करते हैं प्रवेश
हम सब ईश्वर के घर यानी मंदिर जाते हैं तो अपने अहंकार को बाहर छोड़कर ही अंदर जाना होता है और तभी ईश्वर की कृपा हमें प्राप्त होती है क्योंकि अहंकार रहित व्यक्ति ही ईश्वर की कृपा का पात्र है और यही कारण है कि मंदिर में प्रवेश करने से पहले हम झुक कर उसकी सीढ़ियों को प्रणाम करते हैं जो यह प्रदर्शित करता है कि हम ईश्वर के घर अपने अहंकार को छोड़ कर आए हैं।
सम्मान देने का तरीका
जब हम किसी को भी सम्मान देते हैं तो हम उसके सामने झुक कर उसके पैरों को छूते हैं और इसी तरह जब हम मंदिर में प्रवेश करते हैं तो हम सीढ़ियों को झुककर प्रणाम करते हैं जो ईश्वर के प्रति हमारे सम्मान के भाव को दर्शाता है।