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नौकरी छोड़ वीरेंद्र ने स्ट्रॉबेरी की खेती को बनाया रोजगार का साधन, कमा रहे हैं लाखों का मुनाफा

Success Story Strawberry Farming in India: कहते हैं, अगर मन में कुछ करने का जज्बा हो , तो बड़ी से बस कठिनाई भी आपका कुछ नहीं दिखा सकती हैं। अपनी मेहनत और लगन से कठिन से कठिन राह पर भी सफलता पाई जा सकती है। इसी कहावत को सच कर दिखाया है बिहार के करीब स्थित यूपी के महाराजगंज जिले केरहने वाले वीरेंद्र चौरसिया ने .

कभी ₹50 प्रतिदिन की नौकरी करने वाले वीरेंद्र ने लोगों के तानों  के बावजूद अपनी कड़ी मेहनत से स्ट्रॉबेरी की खेती कर न सिर्फ अपने लिए बल्कि 20 अन्य लोगों के लिए भी रोजगार पैदा किया है।

आज के इस आर्टिकल में हम आपको वीरेंद्र के संघर्ष और उनकी सफलता की कहानी के बारे में बताने जानकारी देने जा रहे हैं। जिन्होंने आर्थिक अभाव और तंगी होने के बाद भी मेहनत की राह नहीं छोड़ी और आज सफलतापूर्वक खेती से अच्छा लाभ कमा रहे हैं।

₹50 प्रतिदिन की नौकरी

महाराजगंज के रहने वाले परमेश्वर चौरसिया व  ज्ञानमती देवी के पुत्र वीरेंद्र चौरसिया ने अपने चार भाइयों के परिवार में आर्थिक का अभाव में किसी तरह अपनी हाई स्कूल तक की पढ़ाई पूरी की। उसके बाद वह नौकरी के लिए बाहर शहर चले गए । जहां उन्होंने ₹50 प्रति दिन की नौकरी भी की। परंतु मन में हमेशा कुछ अलग करने की चाह लगी रहती थी।

नौकरी छोड़कर उन्होंने अपने गांव लौटने का फैसला किया और अपने पुश्तैनी जमीन पर खेती करना शुरू कर दिया। पढ़ लिख कर खेती करने पर लोगों ने उन्हें काफी नीचा दिखाया और और ताने भी मारे। लेकिन उन्होंने खेती का काम नहीं छोड़ा।

2017 में शुरू की स्ट्रॉबेरी की खेती

लोन लेकर उन्होंने उन्होंने एक ट्रैक्टर लिया और खेती शुरू कर दी। खेती के बारे में और जानकारी प्राप्त करने के क्रम में उन्हें 2017 में स्ट्रॉबेरी की खेती और इसमें होने वाली मुनाफे के बारे में पता चला। फिर क्या था, उन्होंने हिम्मत जुटाकर  अपने खेतों में स्ट्रॉबेरी लगाना शुरू कर दिया।

धीरे-धीरे करके उन्हें स्ट्रॉबेरी की खेती के बारे में और जानकारी मिली। जिसे उन्होंने अपनी खेती को और बढ़ाया। और ढाई एकड़ में स्ट्रॉबेरी की फसल लगा दी। उनकी मेहनत रंग लाई और स्ट्रॉबेरी की खेती उन्हें अच्छा मुनाफा देने लगी ।

स्ट्रॉबेरी की खेती के लाभ

महाराजगंज के वीरेंद्र ने बताया कि स्ट्रॉबेरी की खेती काफी फायदेमंद रहती है। अक्टूबर माह में इसके पौधे लगाए जाते हैं जो अप्रैल तक फल देने के लिए तैयार हो जाते हैं। वे लगभग 9 लाख की लागत पर ढाई एकड़ की फसल लगाते हैं।

50 से 60 दिनों में स्ट्रॉबेरी का पौधा फल देने के लिए तैयार हो जाता है। और अप्रैल माह से स्ट्रॉबेरी की सप्लाई शुरू हो जाती है। वीरेंद्र के अनुसार वह प्रतिदिन 120 स्ट्रॉबेरी ट्रे मार्केट मार्केट में बेचने के लिए भेजते हैं। एक ट्रे में लगभग 2 किलो के करीब स्ट्रॉबेरी होती है। जिससे वह चार माह के अंदर ही 6 लाख तक का मुनाफा कमा लेते हैं।

20 लोगों को दिया रोजगार

वीरेंद्र अपनी मेहनत और लगन से स्ट्रॉबेरी की खेती कर रहे हैं। उन्होंने अपने साथ-साथ अन्य किसानों को भी इसके लिए प्रेरित किया है साथ ही अपने काम में भी सुनने लोगों को भी रोजगार दे रहे हैं।